बुधवार, फ़रवरी 04, 2009

चिट्ठाचर्चा:टिप्पणी/प्रतिटिप्पणी

सुबह मजाक-मजाक में लम्बी चर्चा हो गयी। आल्हा में चर्चा। आल्हा वाला भाग कल रात लिख लिया था और बाकी सबेरे पोस्ट कर दिया।

कभी राकेश खण्डेलवालजी हफ़्ते में एक दिन नियमित चर्चा करते थे। कविता में। हम करने लगेंगे तो लोग भाग खड़े होंगे। काहे परेशान करते हो कहकर!

वैसे भी जब मैं इत्ती लम्बी चर्चा को दुबारा देखता हूं तो लगता है कि क्या सच में कोई इसे लिंक दर लिंक खोल-खाल के पढ़ता होगा। मुझे तो लगता है कत्तई नहीं। कुछ लोग अपवाद भले हों लेकिन बहुत लम्बी चर्चा के सारे लिंक बहुत कम लोग पढ़ते हैं। फ़िर भी ऐसा क्या है कि जब चर्चा करने बैठो तो लगता है कि ये भी समेट दो वो भी सटा दो।

यह मासूम विश्वास कि लोग हमारा लिखा पढ़ने के लिये तैयार हैं ही शायद लोगो को लिखने के लिये उकसाता होगा। बहुत लोग अपने लिये भी लिखते हैं। लेकिन उसमें भी पढ़े जाने की कामना अवश्य होगी।

बहरहाल सुबह आयी टिप्पणियों पर कुछ चर्चा कर ली जाये!
  1. विवेक सिंह की टिप्पणी:आप मेरे जबलपुर को बदनाम कर रहे हैं .
    आल्हा लिखकर मौज ले रहे हैं .
    ये अच्छी बात नहीं है .
    हम जबलपुर वाले यह सहन नहीं करेंगे . आखिर हम राज ठाकरे के ताऊ जो हैं !

    प्रतिटिप्पणी: भाईजी, जबलपुर जित्ता आपका शहर है उत्ता ही हमारा भी है। राहत इन्दौरी का शेर है:
    सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में,
    किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है।

    जबलपुर वाले टीन-टप्पर की तरह इत्ती जल्दी गर्म नहीं होते। और भैये हमाई मानो तो राज ठाकरे के ताऊ मती बनो भाई! आमची मुम्बई के नारे के समय में ब्लाग जगत में बहुत थुड़ी-थुड़ी हुई थी उनकी।


  2. तरुण की टिप्पणी: इस तरह की चर्चा में तो ज्यादा टाईम लगता होगा, लेकिन जबरदस्त आल्हा उदल लिख डाले। चुपके से कान में ये भी बता दूँ आल्हा उदल की हमें कोई ज्यादा जानकारी भी नही है। लेकिन हम लय में चर्चा को कविता की तरह पढ़ते गये और ऐसे ही मजा आ गया।
    प्रति टिप्पणी: टाइम तो लगा भाई लेकिन बदलाव के तौर पर मजा भी आया। जबरदस्ती के लिये शुक्रिया। आल्हा के बारे में मैंने अपने एक लेख में कुछ जानकारी दी थी। इसके पहले वीर रस में प्रेम पचीसी भी आल्हा शैली में लिखा था। पढ़ियेगा आपको अवश्य मजा आयेगा।

  3. ताऊ रामपुरिया की टिप्पणी: लाजवाब और शानदार आल्हा. मजा आगया जी आज की चर्चा में.
    घणी रोचक बन पडी है. बधाई.
    रामराम.
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया ताऊ! रामराम!


  4. अविनाश वाचस्पति की टिप्पणी: हंसे हंसे जल्‍दी हंसे
    वरना मुस्‍कराये
    कोई समस्‍या हो तो
    शुक्‍ला जी हैं न मौजूद
    इनके बिना चिट्ठाचर्चा का
    नहीं है कोई वजूद।
    प्रति टिप्पणी: अविनाश जी शुक्रिया। चिट्ठाचर्चा दल में विविध रंग के चर्चाकार हैं। हर एक का अपना अलग अंदाज है। सब एक से एक हैं! हमारे अकेले से चिट्ठाचर्चा का कोई महत्व नहीं है। आप अपना सहयोग बनाये रहें। ऐसे ही हौसला बढाकर!

  5. अरविन्द मिश्र की टिप्पणी:आपको आल्ह कवि की उपाधि मुबारक !
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया लेकिन उपाधि है किधर जी? कौन दिहिस?

  6. रुद्र तिवारी की टिप्पणी:mahodaya,
    aalha padh kar maja aa gaya... sath hi tamam yaade bhi taza hui..
    agar aalha ki book ho aapke pas to ek scanned copy laga de chitthe me... abhari rahunga.
    ek bar fir se thanks.

    प्रति टिप्पणी: रुद्र भाई , शुक्रिया आपका। आल्हा की मेरे पास कोई किताब तो फ़िलहाल नहीं है लेकिन आगे कभी शायद आपकी इच्छा पूरी कर सकूं।

  7. अनिल कान्त की टिप्पणी:आल्हा तो बड़ा जबरदस्त रहा ....मजेदार चर्चा!
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया!

  8. सीमाजी की टिप्पणी:जैसा कि कहा जाता है हमेशा कि आज की चर्चा कुश के हिस्से की है। कुश हमेशा नये प्रयोग के पक्षधर रहे हैं सो इसे इस बार आल्हा इस्टाइल में लिखने का प्रयास किया गया। इसके पीछे विवेक सिंह का हाथ है।
    ""वाह वाह मजेदार .....आपकी मेहनत सफल हुई साथ मे विवेक जी की भी पीठ थपथपाई जाए....सफल प्रयास..."

    Regards
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया। वैसे विवेक की पीठ आपके ज्यादा पास है आजकल! वे कानपुर के मुकाबले गुड़गांव के ज्यादा नजदीक हैं!

    Regards

  9. बवालजी की टिप्पणी:हा हा बहुत ही मज़ेदार दिन रहा अनूपजी, ज़ोरदार आल्हा हुए विवेक जी के भी और आपके भी। कुश जी को भी बहुत बधाई। चिट्ठाचर्चा तो आपने बहुत शानदार की है। मज़ा आ गया। सराहनीय और सम्माननीय। साहित्य के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ब्ला॓गजगत के लिए तो उपलब्धि ही कही जावेगी।
    मौज हो गई, मौज ले ली गई, (डबलपुर) वालों ने ख़ुद मौज उड़वा भी ली। अब मगर राज ठाकरे का रिश्तेदार आदि न बताया जावे जैसा विवेकजी ऊपर टिप्पणी कर रहे हैं। आपकी क्या राय है, अब पटाक्षेप हो ?
    प्रति टिप्पणी: तारीफ़ के लिये शुक्रिया।
    रही बात जबलपुर/डबलपुर लफ़ड़े की बात तो मेरी समझ में कोई बात थी ही नहीं। दो लोगों के बिना मतलब के भेद के आपसी मतभेद थे/हैं। उनमें पूर्वाग्रह हैं और कुछ नहीं। अब अपनी पोस्ट में अपने झगड़े , जिनका न कोई तर्क है न कोई आधार , लिखेंगे तो लोग तो मौज लेंगे हीं। विवेक को भी मौज लेने के लिये डबलपुर की जगह जबलपुर ही लिखना चाहिये था। उनको जबलपुरियों की हास्य/कटाक्ष झेलने की क्षमता पर भरोसा करना चाहिये था।

    जबलपुर के लिये डबलपुर लिखना ऐसा ही जैसे फ़ुरसतिया से मौज लेने के लिये कोई सुरसतिया लिखे या अनूप शुक्ल की जगह सनूप उकुल लिखे। हम न मजा ले पायेंगे न खौरिया पायेंगे। कहा भी न जाये, रहा भी न जाये वाला हाल! हम तो कहते हैं कि मौज खुल के लेनी चाहिये ! ताकि जिससे मौज ली जा रही है उसको भी मौज लेने के अवसर मिलें!

    जहां तक राज ठाकरे के ताउ वाली बात तो भाई विवेक की प्रति टिप्पणी में हम कह ही चुके हैं। जबलपुर जित्ता जबलपुरियों का है उत्ता जबलपुर से जुड़ाव रखने वाले दूसरे लोगों का भी है। वर्ना ऐसे तो वहां भी ज्यादतर प्रवासी हैं। परसाईजी के नाम से जबलपुर जाना जाता है वे इटारसी के थे, संस्कारधानी नाम जिनने दिया वे भी जबलपुर के न थे। लेकिन यहां से जुड़े सो जबलपुरिये कहलाये।

    आपने खुद बशीर बद्र का शेर बताया। मेरा तो मानना है कि जिससे आप जुड़े रहे हैं उससे मतभेद/मनभेद होने का मतलब यह नहीं कि आप उसको खुले आम शर्मशार करो। इससे आप दूसरे के बारे में कम अपने बारे में ज्यादा बताते हो। किसी को गलती का एहसास कराने की बजाय नाक रगड़वा के माफ़ी मंगवाना हमेशा बहुत बचकाना अंदाज लगता है मुझे।

    मेरी समझ में तो इस मसले में विवाद जैसी कोई चीज थी ही नहीं जिसका पटाक्षेप हो। बिना सूत-कपास के वर्चुअल लट्ठ भंज गये और लोगों को मौज लेने का मौका मिला।


  10. रंजन की टिप्पणी:कविता मय चर्चा.. क्या बात है.. ये अंदाज भी भाया..
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया जी!

  11. रोशन की टिप्पणी:अच्छा तो ये आल्हा था!
    आल्हा का क्या है न कि बिना सुने समझ में नही आता

    प्रति टिप्पणी: आइये भाई किसी दिन कानपुर सुना भी देते हैं!

  12. शास्त्रीजी की टिप्पणी:अनूप जी बैठे चर्चा लिखने,
    पता चला कि कलम लगी है बहकने.
    कलम लगी है बहकने,
    तो भी जायगी कहां,
    है तो अनूप जी की ही कलम,
    पहुंचेगी चर्चा के ठौर पर ही!!

    आज तो आप ने कमाल कर दिया !!

    सस्नेह -- शास्त्री

    पुनश्च: आपके साथ संगत का असर है भईया, हमारी कलम भी आज कुछ बहकी ही बहकी चल रही है!!

    प्रतिटिप्पणी:
    शुक्रिया शास्त्रीजी। कोई नहीं। बहकने दीजिये। कलम को खुद को भी!

  13. कुश की टिप्पणी: हमारा लिखकर काहे खाली फोकट में हमे बवाल भाई से बधाई दिला रहे है.. और ये विवेक बाबू से ज़रा दूर रहिए.. कविताओ के कीटाणु फैल रहे है.. पहले ताऊ को शुरू कराई फिर गुरुवर अमर कुमार जि को और अब आपको भी..

    चर्चा बढ़िया रही जी..
    प्रति टिप्पणी: भाई चर्चा आन बिहाफ़ आफ़ कुश की गयी तो बधाई तो झेलनी पड़ेगी। विवेक बाबू से कित्ती दूर रहें। जिला अलग, राज्य अलग! रही बात बिगड़ने की तो हम तो कविताई करके छोड़ चुके हैं। :)

  14. रंजना रंजू भाटिया की टिप्पणी: बढ़िया काव्य रूपी चर्चा .बेहद मेहनत की गई है इस में ..शुक्रिया
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया आपको चर्चा पसंद आई!

  15. अनिल पुसदकर की टिप्पणी:पढकर चर्चा आपकी,
    रोम-रोम खिल जाए।
    प्रति टिप्पणी: बांच टिप्पणी आपकी /हम तो हैं शरमाये!

  16. समीरलाल जी की टिप्पणी:मेहनती चर्चा, एक बहुत उम्दा आल्हा. आनन्द आया.
    सब कुछ बहुत बढ़िया. (अगर माईनस विवेक सिंह के कमेंट के पढ़ा जाये तो.)
    प्रति टिप्पणी: शुक्रिया समीरजी! माइनस विवेक सिंह कौन हैं? उनका ब्लाग पता बतायें। कोई ऐसी तरकीब भी बतायें जिससे बीच की ऐसी टिप्पणी को पढ़े जाने से बचा जा सका जो पढ़े जाने पर पसंद न आने वाली हो!

  17. गौतम राजरिशी की टिप्पणी:इस निराले अंदाज की करोड़ों बधाई फ़ुरसतिया देव....
    प्रति टिप्पणी: अरबों शुक्रिया देवाधिदेव!

  18. हिमांशु की टिप्पणी: ऐसी चर्चा का तो आल्हा-कैसेट बन जायेगा. हमारे इलाके में तो आजकल आल्हा के कैसेट खूब बिक रहे हैं.
    चर्चा के लिये धन्यवाद.
    प्रति टिप्पणी: बनाओ न भाई! एक कैसेट हमें भी भेजो। तारीफ़ के लिये शुक्रिया।

  19. परमजीत बाली की टिप्पणी:कवितामय चर्चा अच्छी लगी। प्रति टिप्पणी: शुक्रिया भाई परमजीत बाली

  20. अभिषेक ओझा: हंस तो रहे हैं जी लेकिन बगल वालों को लग रहा है की इसके दिमागी कल-कांटे ढीले तो नहीं पड़ रहे :-)
    प्रतिटिप्पणी:खुलकर हंसने वालों के साथ हमेशा यही हादसा होता है। लोग उनकी समझ पर शक करने लगते हैं!

  21. चंद्रमौलीस्वरप्रसाद जी की टिप्पणी: यह तो छः सितारा चर्चा है और वहां पर तो केवल पांच ही है। सितारे कम पड़ गए। खैर दिन में ही तारे देख लेंगे। अच्छी, बहुत ही अच्छी चर्चा के लिए बधाई।
    प्रति टिप्पणी: हमें तो आपकी टिप्पणी में अनगिनत सितारे दिख रहे हैं। शुक्रिया के शब्द कहीं खो गये तारों की उजास में!

  22. रंजना जी की टिप्पणी:ब्लाग जगत की चलो निकल ली आल्हमय किया संसार.......
    इतना लंबा आल्हा पढ़के भाया मेरा सर चकराय......

    बहुत बहुत जबरदस्त चर्चा.लाजवाब...
    प्रतिटिप्पणी: शुक्रिया रंजनाजी! सर चकराये तो दुबारा बांच लें! ठीक हो जायेगा।

  23. ममताजी की टिप्पणी:अरे वाह आज की चिट्ठा चर्चा तो कमाल है और एक नए अंदाज मे भी ।
    प्रतिटिप्पणी: शुक्रिया आपको चर्चा पसंद आई!

  24. अनुराग आर्य की टिप्पणी: असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।
    तो फ़िर इस पोस्ट का क्या करे भाई "साला ""गाली का प्रयोग .....हे मोडरेटर तुम सुन रहे हो .....ऐ भाई.......
    प्रतिटिप्पणी: देखिये अनुरागजी कि हम अपने लिखे को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं। रविरतलामीजी ने पोस्ट लिखी-गर्ल्स कांट पब साला तो हमने कहा- ई क्या बोलता लाला? मतलब उनको टोंका गया है जी! जबकि रविरतलामी (माफ़कीजियेगा अब रवि भोपालीजी हैं वे) हमारे सम्मानित चर्चाकार हैं। वैसे ई बताया जाये कि पत्नी का बहन साला कब से गाली हो गया। वो तो खाली घर बिगाड़ने के लिये बदनाम था- दीवार बिगाड़ी आलों ने/घर बिगाड़ा सालों नें ई साला गाली कब से हो गया ? अजितजी बतायें। लोग कहते हैं हमारे साले साहब आये हैं। तो भैया साला गाली कैसे हो गया?

  25. डा.अमर कुमार की टिप्पणी:ग़ज़्ज़ब..
    पहिले तो यह पृष्ठ बुकमार्क कर लूँ,
    शायद शनैः शनैः हृदयंगम भी हो जाय

    तो टिप्पणीकार जी उतरो अखाड़े में..


    ऎसी करी ढिंचक मस्त चर्चा आजु शुकुल फ़ुरसतियाय
    टिप्पणी देत झाँकै बगलि सों दाँत निपोरि खड़े हैं भाय
    टूटा फाटा शब्द सहेज़ते तबहूँ फिसलत सँभरत है जाय
    उतरा नवा खिलाड़ी अखाड़े मा फिरौ देय रहा टिपियाय
    जीभ चिपकी जा तालू मा चरचा ऎसी किहौ है भाय



    बोलो हरि गँगा :)
    प्रतिटिप्पणी: शुक्रिया। हम निहाल हुये आपकी टिप्पणी से। बड़े दांत वाले होने के कारण मुस्कराने में शरमा रहे हैं। बवाल भाई फ़िर कुछ कहने लगेंगे!

  26. धीरू सिंह की टिप्पणी:अनूप भैय्या बड़े लिखईया
    नित नित नई विधा अपनाए
    चिटठा चर्चा मे आल्हा देखा
    देख मन प्रफुल्लित हो जाय
    प्रतिटिप्पणी: शुक्रिया। धीरू भाई!अब कोई कविता क्या झेलायें? बहुत हो गया न सुबह!

  27. ज्ञानजी की टिप्पणी:आल्हामय चिच! चैता या बिदेसिया क गवाई कब होये?!वैसे टपाटप इतने ब्लॉग बन रहे हैं कि सोहर गाना चाहिये!
    प्रतिटिप्पणी: सब होई! ज्ञानजी सब होई! सबका दिन नियत है। सोहर आप शुरू करिये न! हम संगत देंगे।


एक लाइना:


  1. हमें नहीं पढ़ना जी आपका ब्लौग, कोई जबरदस्ती है क्या? : हम तो पढ़ लिये तुम्हारा ब्लाग तुम काहे नहीं पढो़गे?

  2. उदीयमान और अच्छे कलमकार ब्लागरो के बारे में आज चिठ्ठा चर्चा :अस्तायमान औरक खराब कलमकारों के बारे में कब चर्चा करेंगे मिसिरजी?

  3. तुमको भी कैसे नींद आएगी ? :तुम्हारा ब्लाग बांचते ही नींद दौड़ी चली आयेगी!

  4. आदिवासियो को मार रहे नक्सली जंगल मे और नेता बहस कर रहे विधानसभा में : दोनों अपने-अपने काम में लगे हैं!

  5. जब पुरूष तपस्या भंग करते हैं ..:बहुत खराब बात होती है!

  6. ट्रेन की बर्थ पर लेटी एक लडकी :देखना थोड़ी देर में सो जायेगी!


मेरी पसंद


कोई छींकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की शांति
भंग न हो जाए,
मगध को बनाए रखना है, तो,
मगध में शांति
रहनी ही चाहिए!


मगध है, तो शांति है!

कोई चीखता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की व्‍यवस्‍था में
दखल न पड़ जाए
मगध में व्‍यवस्‍था रहनी ही चाहिए!


मगध में न रही
तो कहाँ रहेगी?
क्‍या कहेंगे लोग?


लोगों का क्‍या?

लोग तो यह भी कहते हैं
मगध अब कहने को मगध है,
रहने को नहीं
कोई टोकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध में
टोकने का रिवाज न बन जाए!


एक बार शुरू होने पर
कहीं नहीं रूकता हस्‍तक्षेप-
वैसे तो मगध निवासिओं
कितना भी कतराओ
तुम बच नहीं सकते हस्‍तक्षेप से-


जब कोई नहीं करता
तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ
मुर्दा
यह प्रश्‍न कर हस्‍तक्षेप करता है-
मनुष्‍य क्‍यों मरता है?

श्रीकांत वर्मा

और अंत में


फिलहाल इतना ही। कल की शानदार चर्चा का इंतजार करिये। शिवकुमार मिश्र के माउस/की बोर्ड से।

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18 टिप्‍पणियां:

  1. मीट कीट धो कर सब आने , विशुलोक का रंग लुभाय
    अब विवेक सबको है जागो - डबल्पुरिया गीत सुभाय

    उत्तर देंहटाएं
  2. मीट कीट धो कर सब आने , विशुलोक का रंग लुभाय
    अब विवेक सबको है जागो - डबल्पुरिया गीत सुभाय

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  3. अस्तायमान और खराब कलमकारों के बारे में जब आप अपने चिठ्ठे में चर्चा शुरू करेंगे तो भी अपने चिठ्ठे से शुरू कर दूंगा जी . हाँ एक बात पंडित जी कहना चाहता हूँ जो चिठ्ठा बिना जाने सोच कर कर नही लिखते है किसी को भी अमर्यादित ढंग से चिठ्ठा लिखते है और संतुलित और उल उलूल घटिया भाषा का प्रयोग करते है और अपने चम्मचों के ही चिठ्ठे लिखते है उनके लिए मै चिठ्ठा लिखने की शुरुआत करूँगा . उनके लिए भी तो चिठ्ठा चर्चा होना चाहिए . हा हा हा
    नर्मदे हर

    उत्तर देंहटाएं
  4. जब कोई नहीं करता
    तब नगर के बीच से गुज़रता हुआ
    मुर्दा
    यह प्रश्‍न कर हस्‍तक्षेप करता है-
    मनुष्‍य क्‍यों मरता है?
    "मुर्दे का प्रश्न जायज है पर बिचारे को जवाब नही मिलेगा मनुष्य क्यूँ जीता है क्यों मरता है .....अनुतरित प्रश्न"

    टिप्पणियों पर टिप्पणी वाह जम गयी....

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  5. टिप्पणियों पर टिप्पणी सुपर हिट :)

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस प्रति टिप्पणी की प्रति आज ही सुरक्षित कराए.. ऑफर टिल स्टॉक लास्ट..

    हम तो आपको विवेकवा से डोर रहने को कह रहे थे.. वो तो खुद ही आराम ले बैठे.. अब पूर्ण ब्लॉगरत्व को प्राप्त हुए विवेक भाई..

    ये वाली एक लाइना तो कमाल है बस.. इसके लिए 100 नंबर..

    हमें नहीं पढ़ना जी आपका ब्लौग, कोई जबरदस्ती है क्या? : हम तो पढ़ लिये तुम्हारा ब्लाग तुम काहे नहीं पढो़गे?

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज तो टिपणियों पर टिपणी? बडा आनन्द मय लगा.

    उधर हमारा भतीजा अभी तक टंकी पर चढा हुआ है. देखते हैं शाम तक उतर आया तो ठीक, नही तो उतारने जाना पडेगा.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. चोर जायगा चोरी से,
    तो भी नहीं जायगा उठाईगिरी से.
    चले जब अनूप की कलम,
    तो हो टिप्पणी,
    प्रतिटिप्पणी,गद्य या पद्य,
    सीधे या बहकते,
    नहीं जायगा कहीं चर्चा किये बिन,
    हे अनूप तुम्हारा है यह जल्वा !!

    लगे रहो! हर बार चर्चा-कला में एक और नया मान तय करते जा रहे होग्!!
    सस्नेह -- शास्त्री

    उत्तर देंहटाएं
  9. यह नर्मदा के जल में क्या हो रहा है?

    उत्तर देंहटाएं

  10. आज तो टिप्पणीकारों कि क्लास हुई गयी ।
    मैं तलाश रहा उस टिप्पणी को,
    जिसने इस चर्चा के लिये बाध्य किया होगा, ख़ैर..

    कविता पर..
    यह तो शांति की भ्रांति है,जी !
    फिर तो,श्मशान में धूनी रमायी जाये..
    मेरा क्या होगा ?
    मैंनें तो कह रखा है,
    इस गरीब देश का घी, और प्रदूषण-त्रस्त विश्व की बहुमूल्य लकड़ी
    मेरे मृत-देह पर व्यर्थ न की जाये ।
    सो, मिलते हैं, कब्रिस्तान में.. असीम शाँति की छाँव में,
    दस्विदानिया !

    उत्तर देंहटाएं
  11. चलते चलते..
    मेरा नाम बोल्ड में क्यों नहीं ?
    हम आज से इस चीट्ठाचरचा का बहीश्कार करता हूँ !

    उत्तर देंहटाएं
  12. आप टिप्पणी प्रति टिप्पणी में जब हमारी टिप्पणी लेते हैं तो हमें ऐसा क्यों लगता है कि धमका रहे हैं पिछली बार थाने जाने की सलाह दी थी इस बार कानपुर में सुनाने की बात
    अब शब्द पढ़ के मनोभाव तो समझ नही आते न
    सोचते हैं कुछ दिन
    लखनऊ कानपुर रोड से दूरी बना के रखें
    अनुराग भाई राग दरबारी पढिये न
    बकौल छोटे पहलवान
    साला भी कोई गाली होती है ये तो बात कहने का एक तरीका है

    उत्तर देंहटाएं
  13. "सब होई! ज्ञानजी सब होई! सबका दिन नियत है। सोहर आप शुरू करिये न! हम संगत देंगे।"

    ये कब हो रहा है फिर ? !

    उत्तर देंहटाएं
  14. अरे भैया फ़ुर्सतियाजी, हमने ई सब कहाँ कहा था भाई ? आपने तो बाक़ी सब लोगों की टिप्पणियों की प्रति टिप्पणी भी हमारे झण्डे के नीचे कर डाली। अब सब लोग का समझेंगे कि हमने कौनऊ की नाक रगड़वा कर हरकते-बचकाना कर दी। अच्छा फँसाय रहे हो हमको हैं। मालुम नहीं कल कौन कौन को फुनवा घुमाय घुमाय के चिल्ला चोट खाय लिए औ अब नाम हमार बदनाम कर रहे हौ। बहुतै मजेदार हौ गुरूजी। हा हा ।
    राहत इन्दौरी के सेर से राहत का जरूरत हमको नहीं आपै को है तो हमहुँ से सुन लेब ऊ राहत साहब का, आपके भतीजे के काम का सेर--
    उसे कह दो के ये ऊँचाइयाँ, मुश्किल से मिलती हैं
    वो सूरज के सफ़र में मोम के बाज़ू लगाता है
    हम आपकी औ भतीजा तरीफ ही करब रे बब्बा। सिंगल आब्जेक्सन जबलपुरियों को राज ठाकरे का ताऊ बतलावे पै था हमार सो हम अपनी पोस्ट में कह आए हैं। आ जाओ पढ़ लेवो, कित्ते दिन से नहीं ना आए हो का गुस्सा उस्सा होय गए अपने ई बवलवा से। हा हा। नर्मदे हर !

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह ! क्या बात है ।
    वो क्या कहते है की आप छा गए । :)

    इतनी सारी टिप्पणी प्रति टिप्पणी भी कम मेहनत का काम नही है ।
    आपके इस जज्बे को सलाम ।

    उत्तर देंहटाएं
  16. आईला ....हमें तो समझे थे गाली है.
    एक लाइना ..झकास है बीडू.....

    उत्तर देंहटाएं
  17. टिप्पणी पर प्रतिटिप्पणी
    क्या बात है‘चर्चा’के पाणिनि!!:)


    >सोहर हो तो हो पर जोहर न हो.....
    जल्दी टंकी से उतर आओ ताऊ के भतीजे॥

    उत्तर देंहटाएं

चिट्ठा चर्चा हिन्दी चिट्ठामंडल का अपना मंच है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया देते समय इसका मान रखें। असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

नोट- चर्चा में अक्सर स्पैम टिप्पणियों की अधिकता से मोडरेशन लगाया जा सकता है और टिपण्णी प्रकशित होने में विलम्ब भी हो सकता है।

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