बुधवार, जनवरी 14, 2009

जीतने के गुर सिखाते हैं वही इस दौर में

अच्छा बनें

आज की चर्चा का दिन कुश का है। लेकिन कुश आजकल लगता है कुछ काम-धाम कर नहीं रहे लिहाजा कुछ ज्यादा ही बिजी है और चर्चा का काम अनियमित कर रखा है। आजकल के लड़कों का यही हाल है। जो काम करेंगे पूरी मौज से करेंगे, शानदार करेंगे लेकिन नियमित नहीं करेंगे। बड़ा बबाल है।

अब देखो काम भी कैसे करते हैं ये कुश। ताऊ के ब्लाग पर कब्जे का काम कर रहे हैं। कुछ दिन से बहस छिड़ी है कि असली ताऊ कौन है तो अपने को असली ताऊ साबित करने के लिये उनके ब्लाग पर ही कब्जा कर लिया और ताऊ के अंदाज में ही कहानी भी ठोंक दी। अब आप डाई करने से पहले सर के बचे-खुचे बाल में से कुछ तो नोच ही डालेंगे। है न!

नीरज गोस्वामी जो लिखते हैं उसमें अपना पूरा का पूरा प्य्रारा सा* दिल उड़ेल कर धर देते हैं। दोष देते हैं अपने गुरुजी को कि उनका ही सब किया धरा है। उनकी गजल में जो सबसे पसंद की लाइनें वे हैं:

जीतने के गुर सिखाते हैं वही इस दौर में
दूर तक जिनका नहीं रिश्‍ता रहा मैदान से

हमें तो बिटिया मिष्टी की फोटॊ देखकर ही मजे आ गये। आप ने न देखी तो आप भी देख लें। ऊपर उसी की फोटो है। विवेक लोबान का मतलब पूछे हैं। लोबान सुगन्ध होती है। सुलगती है धुंआ देती है। आगे की जानकारी ज्ञानी लोग देंगे।

डा. अमर कुमार देखिये देश की चिंता में कितने पड़सान हैं। शायद इसी हाल के लिये दुष्यन्त कुमार लिखे होंगे (याद से लिखे हैं सुधारक आगे आयें)-
ये जिस्म बोझ से झुककर दुहरा हुआ रहा होगा।
मैं सजदे में शामिल नहीं था धोखा हुआ होगा।


सुरेश चिपलूनकर सन २०४० की कहानी सुना रहे हैं कि उस समय क्या होगा।


हिमांशु की कविता लम्बी है सो वे इसे क्रमश: पोस्ट कर रहे हैं।

अमित की उलझन है कि बन-ठन के चक्कर में ठन-ठन गोपाल बनें कि ऐसे ही मस्त-मौला बने रहें।
आप कुछ सुझाव बालक को। कुंवारा है।

किस्से और भी हैं लेकिन वो फ़िर। शायद शाम को, अगर जल्दी लौट आये। अभी एक काम से तुरंत निकलना है। क्या पता तब तक कुश यहां भी कुछ ठेल दें। आखिर आज उनका दिन है और वे भी तो हैं चर्चा टीम में।

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21 टिप्‍पणियां:

  1. ये जो ली शुकुल जी महाराज की इत्ति छोट चर्चा !!
    मजा नहीं आवा सरकार!!
    ऐ!! भइया कुशकाहे का नए लड़कन का नाम धरावत हो जी!!अपने टाइम मा लग जावा करो!!


    नहीं तो!!! बरात कथा मा बिघ्न बाधा पड़ जाई तो ???

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  2. कुछ दिन से बहस छिड़ी है कि असली ताऊ कौन है तो अपने को असली ताऊ साबित करने के लिये उनके ब्लाग पर ही कब्जा कर लिया
    " असली ताऊ कौन की कहानी भी अजब हुई गई, सुलझने में ही ना आई .....वैसे कही आप ही तो.....ना ना हम कुछ ना कही...इहाँ उहाँ की सुनी रही बस... आज इत्ती जरा सी चर्चा काहे करी..."

    regards

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  3. "शानदार करेंगे लेकिन नियमित नहीं करेंगे। बड़ा बबाल है। "

    'बवाल' कोई गाली है क्या ? बवाल जी आते ही होंगे :)

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  4. ये सारा जिस्म झुक कर , बोझ से दोहरा हुआ होगा ।
    मैं सजदे में नहीं था , आपको धोका हुआ होगा ।
    - दुष्यन्त कुमार ( साये में धूप )

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  5. इस चर्चा का क्रमशः अभी शेष लगता है, नहीं तो इतनी छोटी चर्चा.

    निश्चय ही ’कु” पूरी कुशाग्रता से चर्चा की तैयारी कर रहे होंगे.

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  6. गुरु हमको नीचे भेजे हैं,
    जरा देखकर आओ, कि आज की चर्चा पर क्या होरहा है..
    सो, उनका आधिकारिक वक्तव्य जारी किहे दे रहा हूँ,
    स्पष्टीकरण वास्ते फ़ुरसतिया :
    छ्त पै पतंग की पेंच फँसा कर कोई कितनी चर्चासेवा कर सकता है, जी ?
    अमर कुमार को माँझा पकड़ा कर आये हैं,
    जो हमेशा मेरी पतंग कन्ने से कटवाने की फ़िराक में पाये जाते हैं..
    इतना ही है तो, आपही कल्लो ! - अनूप शुक्ल

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  7. पूर्ण विश्वास तो नहीं, पर आशा है, कि
    उपरोक्त टिप्पणी व्यक्तिगत आक्षेप की श्रेणी में किंवा न आती हो !
    आक्षेप और मौज़ के बीच की LOC अभी निर्धारित नहीं हुई है,भईय्यू !

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  8. यह चर्चा है या चिटठा टिपण्णी...?ताऊ के ब्लॉग पर कब्जा कर वहां चर्चा रहे कुश की सजा क्या होगी??

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  9. यह संक्षिप्‍त चर्चा भी कम रोचक नहीं है। ताऊ के ब्‍लॉग पर कुश का कब्‍जा देख मामला और पहेलीनुमा होता जा रहा है। अभी जा रहा हूं पड़ताल में। बहरहाल नीरज भाई की बिटिया की खुशी देख हम भी खुश हो गए।

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  10. अनूप जी जब आप हमें इतना मान देते हैं तो लगता है वास्तव में फुरसत में हैं.....हम अपना दिल ससुरा तो बरसों पहले एक ससुरी को दे फारिग हो लिए...अब जो उंडेलते हैं वो दिमाग का कचरा है...गुरु उस कचरे से कुछ काम की चीजें बीनना सिखाते हैं...
    अशोक पाण्डेय जी मिष्टी हमारी पोती है याने बेटे की बेटी...अब बाल काले रह गए तो इसका अर्थ ये मत लगाईयेगा की उम्र नहीं हुई...हम झूट बोल के खुश भी हो सकते थे...लेकिन आईने को क्या मुहं दिखायेंगे सोच कर सच बोल गए...
    कुश की क्या बात है...वो कुछ भी बन सकते हैं...
    नीरज

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  11. अच्छी चिटठा चर्चा है . मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामना

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  12. फोटो का जवाब नहीं, बाकी चर्चा बढ़िया. छोटी किसको लग रही है ? अभी खाली होती उससे कितना गुना बड़ी है !

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  13. चिट्ठा चर्चा ' वामन - अवतार '
    धन्य - धन्य मेरे ' सुकुल सरकार |
    बूझ ना पाएओ कुश कै कुशाग्रता
    ठंडी मा सरकाए लिहीन खटिया |
    आपौ खूब ठेलेओ उनके बेगार
    लिंकेओ '३६सा 'लाईन सोलह बटा चार||

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  14. छोटी चर्चा की चोटी की बधाई. :)

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