शुक्रवार, जनवरी 30, 2009

ब्‍लॉगपठन तालीबानी समय में

न जी हम श्रीराम सेना में भरती नहीं हो गए हैं अगर खुद श्रीराम भी अपनी सेना का भरती दफ्तर हमारे पड़ोस में खोल लें तब भी मुश्किल ही है कि वो हमें रंगरूट बनाना चाहेंगे। बिना श्रीराम सैनिक हुए भी हम चर्चा को तालीबानी कह रहे हैं क्‍योंकि सारा ब्‍लॉगपठन तालिबानमय हो रहा है। इतना विज्ञापन तो खुद मुल्‍लाउमर और फजीजुल्‍लाह नहीं कर पाए तालिबान का जितना ब्‍लॉग की दुनिया में हो रहा है। पहले तो मीडिया ही तालिबान है कांग्रेस, गहलोत, उलेमा, तिलेमा तो हईंए तालिबान-

आज एनडीटीवी में एक खबर आ रही थी कांग्रेसी तालिबान। अशोक गहलोत कुछ कह गये और हो गये तालिबान इससे पहले कर्नाटक में श्रीराम सेना द्वारा किये करतब को तालिबान की संज्ञा दी गयी। यानि कैसे न्यूज बिके इस चीज पर ध्यान है। समाचारों में इतना हल्कापन। अफसोस है इलैक्ट्रानिक मीडिया पर जो इस प्रकार के मुहावरे गढ़ने में माहिर हो गया। क्या मीडिया के लोगों को तालिबान के कारनामे पता हैं यदि पता होते तो कभी भी इस प्रकार के शब्द नहीं गढ़ते

कथित तालिबान एक्‍सप्रेस की भी बात करनी ही होगी...आजमगढ़ से चली कुछ हजार वोट भरकर और हिला दी दिल्‍ली इनकी बराबरी धोती टोपी वाले तालिबानियों से-

बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में आतंकवादियों की कारगुज़ारियों पर पर्दा डालने के लिए मौलाना अमर सिंह और अर्जुन सिंह के बोये बीज अब पनपने लगे हैं । उलेमाओं का जत्था दिल्ली पहुंचकर मामले की एक महीने में न्यायिक जांच का दबाव बना रहा है । उन्होंने सरकार को आगाह भी कर दिया है कि जल्दी जांच रिपोर्ट नहीं आने पर मुसलमान कांग्रेस को एक भी वोट नहीं देंगे । ये लोग कौन हैं ...? क्या ये वाकई इस देश के नागरिक हैं ...? अगर जवाब हां है , तो कैसे नागरिक हैं ,जिन्हें अपने शहर के लडके तो बेगुनाह और मासूम नज़र आते हैं , मगर दहशतगर्दी के शिकार लोगों के लिए इनके दिल में ज़रा भी हमदर्दी नहीं

इतना तो तय है कि आदि ने जन्‍म लेने के कोई बहुत एप्रोप्रिएट समय नहीं चुना है चारों ओर तालिबान...;बहुत से शुभकामना संदेशों की जरूरत पड़ेगी बालक को-

new member

 

धर्म, मुल्‍ला उल्‍ला से ही जुड़ा है मसला हिन्‍दू से मुसलमान हुई फिजा का, माया मिली न राम। 

आईये फिज़ा की बात करते हैं..चांद को भी देखा लोगो ने और फिज़ा को भी कहीं से दोनो का कोई मेल नही था ..जो मेल था वो इतना की एक के पास दौलत थी और दूसरे का पास सुदरता.. फिर वो ही हुआ जो होता आया है दौलत ने हुसन जीत लिया..एक इतने अच्छे धर्म का ग़लत इस्तमाल कर दोनो दुनिया को दिखाने के लिये एक हो गए..चाहत दोनो की थी ऐश के दोनो तलबदार थे .

वैसे जिन्‍हें अभी भी तालिबान पहचानने में कठिनाई हो वे जान लें कि आजकल इनकी कर्मभूमि हो गई है पब और इनका विजयघोष है भारतमाता की जय।

' भारतमाता की जय ' का नारा लगा कर कुछ माह पहले ओड़िशा में एक नन का बलात्कार किया गया था । मंगलूर में भी यही नारा लगाने के बाद स्त्रियों के साथ अभद्र आचरण किया गया , उन्हें मारा - पीटा गया । ओड़िशा और मंगलूर से जुड़े सिपाहियों की बुजदिली का इतिहास है । राष्ट्रीय आन्दोलन के दरमियान लाखों लोग जब लाठी - गोली खाते थे , जेल जाते थे और ' भारत माता की जय' का घोष करते थे तब यह बुजदिल वाइसरॉय की कार्यकारिणी में शामिल होते थे

 

खैर हम क्‍यों तालिबान को अपने लिखने का एजेंडा तय करने दें। इसलिए चलते हैं ढेर सी और पोस्टों पर आमने सामने के साथ-

कुतिया का जनाज़ा है जरा धूम से निकले   -   रंग लाएगी फ़ाक़ामस्ती एक दिन…

ब्लागर सिर्फ़ ब्लागर ही नही होता बल्कि रिश्तेदार भी होता है    - एक झगडा रोजाना...

पद्मश्री का बनता मजाक...    -   अफसोस के कुछ क्षण

अरविन्द का खेत     -    ट्रैफिक जाम में फंस गया

हिन्दू और इस्लाम दोनों धर्मों का अपमान..  -  कुछ कहूँ..?

आई पॉड कौन सा लूं (अविनाश वाचस्‍पति)  -  छोटी छोटी बातें

धोती- टीके वाले भी होते हैं तालिबानी    -  अहिंसा का पुजारी ,हिंसा का शिकार हो गया

दरोगा ने किया अपराध    -   ठलुए पहरेदार

विद अलाटमेंट, पर बिना फ्लैट सुदामा    -  पिछला कुछ भी बदला नहीं जा सकता  

सूरज की तलास में    -     आवारा मन

देख महेंद्र भाई....अब कब्र में हो रही है शादियां       -        नुक्कड़ निमंत्रण

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15 टिप्‍पणियां:

  1. आमने सामने पढ़कर वाह वाह किए बिना नही रह सके|

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  2. अच्छी चर्चा के लिये धन्यवाद.

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  3. बहुत लाजवाब जी.क्या बात है.... क्या अंदाज़ है.टनाटन चर्चा हो गई यह तो !आमने सामने पढ़कर वाह वाह किए बिना नही रह सके|अच्छी चर्चा के लिये धन्यवाद.
    yani
    MIND-BLOWING

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  4. बेहतरीन रस्मी चर्चा..
    विषयनिष्ठता बरकरार रखने का आभार !

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  5. masijivi bhai, bahut khoob charchaa rahee ye, sachmuch padh kar maja aa gaya.

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  6. शानदार चर्चा ! आमने सामने भी बहुत खूब रही !

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  7. सुन्दर।
    आमने-सामने शानदार!
    बालक को मंगलकामनायें।

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  8. चिट्ठाचर्चा के जो मापदंड चल रहे हैं या जो स्थापित हो गये हैं उसके हिसाब से यह एक हृस्व चर्चा है. लेकिन गुणवत्ता में उत्तम है. खास कर आपका आमने-सामने तो बहुत खूब है.

    सस्नेह -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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  9. bahut khoob , hain to hum bhi media se kuch kuch jude huey par yakin jaaniye abhi bhi media me kuch gandhi jaise log bache huey hain.

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