शुक्रवार, जनवरी 23, 2009

जब मोदी की चरितावली ने हमें मुदित किया

नरेन्द्र मोदी पर लिखी दो पोस्टें जब ब्लॉगवाणी की हिट – लिस्ट में सबसे ऊपर चढी देखीं ! देखकर लगा कि अपने छात्रों को ब्याजनिंदा और ब्याजस्तुति अलंकार पढाने के लिए ये उदाहरण हार्डकॉपी पर ले जाऎंगे ! नरेन्द्र मोदी के दस अवगुण गिनाते हुए संजय बेंगाणी जी ने एक महान नेता के छिपे हुए / अनदेखे चारित्रिक पहलुओं से अवगत कराकर गहरा रिसर्चात्मक आलेख लिखा है ! इसके प्रति शोधात्मक आलेख में एक सच्चे हिंदुस्तानी ने मोदी जी का सिर्फ एक गुण लिख कर सौ सुनार की एक लुहार की वाला मुहावरा भी चरितार्थ कर दिखाया ! हिंदी ब्लॉग लेखक की नजर राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय नेताओं पर भी है !

ओबामा के डे वन से ही हिंदी ब्लॉग जगत ने उनसे उम्मीदें बांधते हुए घोषित किया है कि ओसामा का तोड है ओबामा !  कुछ पोस्टों को देखकर लगता है कि ओबामा का नाम गीतों और पोस्टों के टाइटिल लिए काफी सार्थक है इसके उच्चारण मात्र से आतंकवाद का भूत भाग जाएगा ! अविनाश वाचस्पति लिखते हैं -

क्या आप जानते हैं कि ओबामा का एक नाम बैरी भी है। जो कि आतंकवाद के दुश्मन के रूप में सामने आ रहा है। अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनते ही ओबामा प्रशासन ने आतंकवाद के विरुद्ध जो जंग छेड़ी है। जंग जो अभी नीतियों के तौर पर है। पर इससे ओबामा के आतंकवाद बैरी के रूप में एक सख्ती छवि दिखलाई दे रही है। जो कि उनके सदा दिखाई देने वाले खिलखिलाते चेहरे के बिल्कु‍ल विपरीत है।

 

काश !! ऎसा ही हो ! अजदक ब्लॉग में आतंकियों और युद्ध अपराधियों को सज़ा दिलवाने की विज्ञप्ति पर दस्तख्त करने की अपील की है ! हिंदी ब्लॉगिंग को अनाम होकर निजी वार करने का एक बेहद गैरजिम्मेदार माध्यम मात्र मानने वाले ऑफलाइन तबके की निष्क्रियता और वैचारिक निरुद्देश्यता के लिए इस तरह की पोस्टें अच्छा जवाब हो सकतीं हैं!

 

चुराई हुई डायरियां और चुराई हुई कलाकृतियां और उनके खुलासे ! रवीन्द्र व्यास के ब्लॉग हरा कोना पर कैनवास के कारोबार के काले कारनामों पर रोशनी डाली गई है ! अपने ब्लॉग अजदक में प्रमोद जी  हिंदी लेखकों की चुराई हुई डायरी का एक असंपादित अन्यतम संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं अवश्य पढिएगा ! सजग पाठकों और श्रोताओं की कमी आज हर कला माध्यम के सामने है ! दिनेश्वरराय जी का प्रेरक संस्मरण - कविता आगे पढी तो कवि सम्मेलन यहीं समाप्त इस लिहाज से बेहद पठनीय है !संस्मरण सुनाने की उनकी कला की तारीफ करते हुए अजित वड्नेरर्कर जी लिखते हैं-

बहुत प्रेरक प्रसंग...ऐसे सजग श्रोता ही नहीं, सजग नागरिक भी चाहिए...जो जनप्रतिनिधियों को भी यूं ही आड़े हाथों लें...
बेहद स्तरीय पोस्ट वकील साब...आपके संस्मरण सचमुच रंजक तो होते ही हैं, सीख से भरपूर भी।

हिंदी ब्लॉगिंग में अपनी वैचारिक और दिशा संबंधी स्पष्टता के प्रति खूब समर्पित है - हिंद युग्म ! पुरानी यादों को ताज़ा करने वाले पॉडकास्टों और नई प्रतिभाओं को मंच दिलाने के दोहरे लक्ष्य के लिए जुटा यह ग्रुप निश्चय ही अलग और सराहनीय है ! इस बार यहां सुनिए - मन्ना डे की आवाज़ !  इस बार लिखते हुए ब्लॉग पर कविताएं कम दिखाई दीं कविताओ की चर्चा ज्यादा दिखी ! विवेक जी की कविता में बुश की महानता पर प्रशस्ति अवश्य पढिए -

सही थे बुश के सारे काम ।

स्वयं को करके भी बदनाम ॥

राष्ट्र को रखा सदा आश्वस्त ।

स्वयं जूते खाकर भी मस्त !!

पूर्णिमा बर्मन जी की कविता में भीड में खो गए वसंत की तलाश और पीडा दिखाई देती है !

वक्त कम है चिट्ठे कई हैं ! चर्चा ज्यादा नहीं हो पाई है सो टिप्पणियों में आप सबकी ओर से छोटी चर्चा की शिकायत का भय  भी लग रहा है ! किस पोस्ट को लूं किसको छोड दूं के प्रश्न ने वैसे ही थका डाली हैं मुट्ठियां ! जो मुझसे छूट गए हैं वे मुझे मुआफ करेंगे ऎसी उम्मीद बिना किसी आश्वासन के पाल लेने के अलावा कोई चारा नहीं है ! :)  लीजिए ये किया पब्लिश .... !

आज की तस्‍वीर सुनीलजी के कैमरे से:

धकधक, धकधक, रात को सोते सोते भी, सुबह उठते ही. "यह करना है, वह करना है", फिरकनी की तरह घूमने लगो तो रुका नहीं जाता. चिट्ठे में कुछ लिखना तो दूर की बात है, कुछ भी पढ़े हुए सप्ताह बीत जाते हैं. सुबह अँधेरे निकलो, रात को अँधेरे थके हारे घर आओ, लगता है कि यह अंतहीन शीत कभी बीतेगा ही नहीं

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10 टिप्‍पणियां:

  1. इत्ती बढ़िया चर्चा का अंत मुआफी मांग कर करना तो ज्यादती ही कहलाई. बहुत उम्दा चर्चा. बधाई ले लें.

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  2. घुली-मिली चर्चा


    ---आपका हार्दिक स्वागत है
    गुलाबी कोंपलें

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  3. हिन्दी ब्लॉगजगत सुनार-लुहारीकरण में रहता है या वाहवाहीकरण में।
    कोई मध्यमार्ग है ही नहीं! :-)

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  4. अब यह ब्याजस्तुति अलंकार कौन सा अलंकार हो गया?

    फिर स्तुति और प्रशंसा में भी फर्क है. वैसे हमें यह चर्चा पसन्द आयी. मगर आपका स्तुतिगान नहीं करेंगे :)

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  5. निन्दा च स्तुति दोनों ही कर्ता को प्रभावित करती हैं।

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  6. बहुत बढिया जी. बख्त पर निण्दा और स्तु्ति दोनो ही करनी पडती है.

    रामराम.

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  7. पढने पढाने वालों के सम्पर्क में रहेंगे तो कुछ सीखेंगे ही . चलिए एक नया अलंकार तो पल्ले पडा ! ऐसे ही ज्ञान बढाते रहें जी !

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  8. बहुत दिन बाद आप आईं। बढिया चर्चा करी।

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  9. मैने शायद आपकी चर्चा पहली बार पढ़ी. अच्छी चर्चा.

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  10. चर्चा अच्छी बन पड़ी है मीलिमा जी.
    - विजय

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