सोमवार, जनवरी 05, 2009

कुझ रुख मैनूं पुत लगदे ने, कुझ रुख लगदे माँवाँ






कल एक समाचार आ रहा था कि विश्व में जिस देश को अपनी सुरक्षा का खतरा जहाँ से हुआ उसने उसे तबाह कर दिया। उदाहरण के रूप में अमेरिका का लादेन की खोज में अफगानिस्तान, इजरायल को तो अभी अभी गाज़ापट्टी से भी जान सुन रहे ही हैं, श्रीलंका जैसे देश ने लिट्टे की तबाही की कमर कस ली है। इन उदाहरणों के बाद एक बड़ा प्रश्नवाचक भारत के नाम के साथ था कि भारत क्या कर रहा है? उत्तर था - बयानबाजी। यदि आप में से किसी के पास अतिरेकी हिंसा का हल बयानबाजी से निकलने का कोई यन्त्र-तंत्र हो तो वे इस देश की सरकार की कुण्डली का उपाय करके कुंडली मारे बैठे नाग का नाश करने की सिद्धि सुझाएँ। वरना ये लोग तो सही आदमी की सही बात को कान पर जूँ की तरह भी नहीं रेंगने देते।

पर इस देश का हाल तो बुरा है, इसे अतिरेकी हिंसकों के समापन के उपाय भी इसके आक्रान्ता ही बता रहे हैं --

क्योंकि अब भारत को ब्लैकमेल करने पर उतरा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने अपने इस प्रस्ताव में कई शर्ते शामिल की है। इन शर्तों में यह भी जुड़ा हुआ है कि जो अधिकारी पाकिस्तान में पूछताछ करने जाएंगे उनके बारे में पहले पाकिस्तान सरकार का गृह विभाग उनके चरित्र स्वभाव और व्यक्तित्व की पुष्टि करेगा और तभी उन्हें पाकिस्तानी नागरिकों से मिलने दिया जाएगा।

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अमेरिकी दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान ने यह एक नया दाव खेला है। इस दाव का एक पैतरा यह भी है कि भारत उन्ही लोगों से पूछताछ कर सकेगा जो फिलहाल पाकिस्तान सरकार की हिरासत में है। सभी जानते हैं कि पाकिस्तान ने ज्यादातर उन अपराधियाें और अभियुक्तों को अपनी पहुंच से बाहर बताया है जिनकी तलाश भारत में हुई इस ऐतिहासिक हिंसा के सिलसिले में हैं।

लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशंस कमांडर जकीर उर रहमान लखावी और इसी संगठन के संचार विशेषज्ञ जरार शाह को एफबीआई के दबाव में पाकिस्तान सरकार ने हिरासत में लिया है। लेकिन इनसे भी पूछताछ की शर्त यही है कि पूछताछ के दौरान पाकिस्तानी अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा शर्त यह भी है कि इस पूछताछ की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी और पूछताछ में जो तथ्य सामने आएंगे उनका दस्तावेज भारत के साथ पाकिस्तानी अधिकारियों के दस्तखत से ही प्रमाणित होगा।



अन्य भारतीय भाषाओं से

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अपने देश में जैसे कला आक्रमण करने की तैयारी में लगे हैं और वे वाद्य विस्फोटक बनाने की जानकारी भारतीय भाषाओं वाले भिन्न वर्गों को दे रहे हैं -


अग्नीवाद्यांपैकी एक म्हणजेच स्फोटवाद्य (पायरोफोन) ! यांत ज्वलनशील वायुंचा एका भव्य कुपीत कमी-अधिक प्रमाणात स्फोट करून सूर निर्माण केले जातात. ज्याप्रमाणे संवादिनीवर सुरांसाठी विविध कळी असतात त्याप्रमाणे हा प्रकार असतो. मात्र, संवादिनीत एखादी कळ दाबली की त्या-त्या कळीच्या अनुषंगाने असलेली धातूची पट्टी हवा बाहेर जातांना कंप पावते आणि सूर येतो. स्फोटवाद्यामध्ये मात्र प्रत्येक सुराचे अनुषांगाने कळीचे काय वजन पडले असता स्फोटानंतर योग्य सूर येईल त्याचे गणित केलेले असते. त्यावरून पाश्चात्य पद्धतीचे पूर्ण सप्तक त्यात बसवलेले असते. काही उत्साही लोक निकामी झालेल्या गाड्यांचे भाग या स्फोटवाद्यात रूपांतरीत करतात. तर, काही वीर चक्क ठीकठाक असलेल्या गाडीच्या यंत्रभागाचे स्फोटवाद्यांस पोषक ते बदल करतात. म्हणजे, गाडीला इंधन जास्त लागते, परंतू ती चालू असतांना संगीत वाजवत-वाजवत जायचे. आपल्या गावाकडे बैलगाड्यांमध्ये बैलांच्या गळ्यात घंटा वापरण्यासारखा प्रकार म्हणायचा.



यहाँ देश की विकट परिस्थिति का उत्तरदायी कौन है, यह आज के मत का विषय है -

देशाच्या अशा परिस्थीतिला जबाबदार कोण ?

कॉंग्रेस.
सर्व राजकारणी.
मिडीया.
भाजप
मुसलमान.
हिंदू लोक.

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स्व. शिव कुमार बटालवी पंजाबी के अमर कवि के रूप में ख्यातिप्राप्त कवि हैं, उनकी एक रचना जो वृक्षों और पौधों के मानवीकरण पर है, उसे पढ़वाने का सुख अवश्य लेना चाहती हूँ -



कुझ रुख मैनूं
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कुझ रुख मैनूं, पुत लगदे ने
कुझ रुख लगदे मावां
कुझ रुख नूंहां धीआं लगदे
कुझ रुख वांग भरावां
कुझ रुख मेरे बाबे वाकण
पतर टावां टावां
कुझ रुख मेरी दादी वरगे
चूरी पावण कावां
कुझ रुख यारां वरगे लगदे
चुंमां ते गल लावां
इक मेरी महिबूबा वाकण
मिठा अते दुखावां
कुझ रुख मेरा दिल करदा ए
मोढे चुक खिडावां
कुझ रुख मेरा दिल करदा ए
चुंमां ते मर जावां
कुझ रुख जद वी रल के झूमण
तेज वगण जद वावां
सावी बोली सभ रुखां दी
दिल करदा लिख जावां
मेरा वी इह दिल करदा ए
रुख दी जूने आवां
जे तुसां मेरा गीत है सुणना
मैं रुखां विच गावां
रुख तां मेरी मां वरगे ने
जिउण रुखां दीआं छावां।
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विश्व से
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यदि किसी भिन्न भिन्न वर्ण या 'रेस' वाले दंपत्ति के जुडवाँ बच्चे हों व एक श्वेत व दूसरा अश्वेत हों तो अचरज होता है विधाता की लैबोरेट्री पर, पर यही जुड़वां बच्चे दूसरी बार व इसी प्रकार श्वेत-अश्वेत एक-एक हों तो इस आश्चर्य की बड़ी ख़बर बन जाती है।





सेन्ट्रल पुर्तगाल की १० सितम्बर १८९३ को जन्मीं Maria de Jesus का यह चित्र ९ सितम्बर २००६ को लिया गया था। वे विश्व की सर्वाधिक आयु की व्यक्ति में रूप में ३ दिन पूर्व सिधार गयी हैं






कोई व्यक्ति किसी दिन एक लाटरी का टिकट खरीदे व उसी दिन अकस्मात हृदयाघात से उसकी मृत्यु हो जाए और बाद में एक दिन पता चले कि उसी टिकट पर $१० मिलियन की लाटरी लग गयी है तो इस संयोग को आप क्या नाम देंगे ? शायद सोचें कि ये सारे अजूबे उन्हीं लोगों के साथ क्यों घटते हैं... ।





अभिलेखागार से अंश
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कुछ दिन पूर्व भय की उत्पादकता के सम्बन्ध में चर्चा चली थी, आज चर्चा के अभिलेखागार से उसी से मिलती जुलती चर्चा वाली २००५ की एक प्रविष्टि आप बाँचें -



अगर आप किसी शहर में भटक गये हों तो परेशान न हों। किसी कैफे में जाकर नेट पर रोजनामचा पढ़ें। आपको पता चल जायेगा आप कहां हैं। अतुल ने खास प्रोग्राम बनाया है इसके लिये।अभी कुछ खास शहर से बात शुरु की गयी है। बाकी बाद में जुड़ेंगे।

लेकिन किसी भी शहर में घुसने के पहले वंदना के सुरों में कुछ सुर जरूर मिला लें। लक्ष्मी गुप्ता जी सुना रहे हैं वंदना।

जीतेंद्र चौधरी लगता है सबको भारत दर्शन करा के ही मानेंगे। फन वैली तथा पहाड़ी रास्तों के खूबसूरत नजारे देखिये। हां अगर कहीं देश की

बात चली तो भ्रष्टाचार तो आयेगा ही रवि रतलामी के साथ।

जो डरता है वही डराता है। आजका सबसे भयभीत समाज है वह जिसके पास सबसे ज्यादा ताकत है। यह मैं नहीं खाली-पीली वाले शीष श्रीवास्तव कह रहे हैं:-
कहा जाता है की इस देश का इतिहास ही हिंसा से भरा हुआ है. वो रेड इंडियनों से संघर्ष हो, या उसके बाद का खूनी स्वतंत्रता संग्राम. विश्व युद्ध और उसके बाद शीत युद्ध्. और आंतक के खिलाफ युद्ध. ये सभी कारण है इस भय का.
लेकिन क्या ये सच है ? पता नही. नियति कि विडंबना दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र और सबसे ज्यादा भयभीत जनता !



स्त्रीलेखन

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कानपुर में रहने वाली श्रीमती विमला तिवारी विभोर ७१ वर्षीया ब्लॉग हैं, जो कहती हैं-



दर्शन तथा भावपूर्ण साहित्य पढ़ती हूँ। ज्योतिष और संगीत मेरे प्रिय विषय हैं। महादेवी और टैगोर मेरे प्रिय कवि।


सन्नाटा निरन्तर आकर्षित करता था पर वहाँ रहने की इच्छा न थी, पर धीरे धीरे चल कर वे क्षण आ ही गए। मैं स्वागत को राजी न थी मगर भयभीत भी न थी। मुझे घेरकर वह गुनगुनाने लगा मैं चकित रह गई ठगी ठगी.. फिर उस अनुभूति को शब्द देना मेरा आनन्द बन गया। जहाँ मैं पीड़ा भूल गई और साक्षात्कार हो गया उस अनजान चितेरे का। अपने बारे में सोचने का कभी मौका नहीं मिला; जैसे कोई मेरा पीछा कर रहा है और मैं भागती जा रही हूँ। पर जब सोचा तो आश्चर्य से भर गई; ये जगत एक तीर्थ, एक उपवन, एक पाठशाला लगा। कुछ अपूर्व जानने की अदम्य इच्छा सदा से है। हर वस्तु मुझे विभोर कर देती है इसीलिए मेरे पति ने मुझे ‘विभोर’ उपनाम दिया। मेरी कविता ही मेरे मन के भेद खोलती है। मैं जो कहूँगी वह अभी की बात है, अगले क्षण मैं क्या सोचूँगी, मैं खुद नहीं जानती। नहीं तो जीवन बिलकुल बेकार हो जाता- व्यर्थ।



उनकी अंतिम प्रविष्टि में निहित अपने अस्तित्व की प्रमाणिकता को स्थापित करने वाली स्त्री के मनोभावों को शब्द देने की जद्दोजहद ने मुझे प्रभावित किया था। पता नहीं उसके पश्चात् उनकी कोई प्रविष्टि नहीं आई. विमला जी निर्मल आनंद वाले जी की माताश्री हैं, सो वे इसे बता सकते हैं कि क्यों उन्होंने लिखना यकायक बंद कर दिया।

आप उनकी वहाँ प्रकाशित इस कविता की स्वातंत्र्य-चेतना से प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे -

Friday, 1 February, 2008

पद चिह्नों पर नहीं चलूँगी


पद-चिह्नों पर नहीं चलूँगी
यह आदेश नहीं मानूँगी
चरण-चिह्न हो अलग हमारे
इतना ही अनुरोध करूँगी

पद-चिह्न के साथ चलूँगी
उनके चारों ओर चलूँगी
पूजा भी उनकी कर दूँगी
आदर-मान सदा मैं दूँगी
पर इन पर मैं चलूँ प्रिये
इतना तो कर नहीं सकूँगी

तुम भी इसी जगत के वासी
मेरा भी अस्तित्व अलग है
अपने-अपने चिह्न के संग
हम दोनों एक साथ चलेंगे
तुम अपनी पहचान बनाओ
मैं अपनी धुन में रम लूँगी

पूज्य चरण पर चरण टिका कर
क्यों अपमान करूँ मैं उनका
मैं इनका अनुगमन करूँगी
उनसे कुछ शिक्षा भी लूँगी

पद-चिह्नो पर चलकर तुम भी
कोई राह नहीं पाओगे
चिह्न बनाकर आगे बढ़ते
कोई राह ढूँढ पाओगे

राह हमारी एक रहेगी
लक्ष्य हमारा एक रहेगा
चिह्न बनाते आगे बढ़ते
हम दोनों एक साथ चलेंगे

क्षितिज पार एक साथ करेंगे
चरण-चिह्न पर अलग रहेंगे



अंत में
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)

संस्कृत में मेघदूत ( पूर्वमेघ भाग) (महाकवि कालिदास कृत) यहाँ पढ़ें
व शैलेश खांडेकर कृत
मराठी अनुवाद को यहाँ पाएँ



)
आज सामयिकी चिट्ठा वार्षिकी २००८ सर्वेक्षण का अन्तिम दिन है, आप सभी ने अपनी अपनी राय दे दी होगी, अन्यथा आज शाम ५ बजे से पूर्व अवश्य दे दें। इस सर्वेक्षण में एक प्रश्न है ब्लोगिंग से आय के सम्बन्ध में








तभी मुझे मराठी ब्लॉग जगत के सर्वोत्तम मराठी विनोद पर इसी प्रसंग में एक हास्य दिखा, आप भी हँस लें -


सोपा मार्ग.

दोन भिकार्‍याचा संवाद
पहिला भिकारी : अरे , मी एक पुस्तक लिहिल आहे.
दुसरा : काय नाव आहे त्याच ?
पहिला : सहज पैसा कमावण्याचे सोपे १००१ मार्ग.
दुसरा : तर तु भिक का मागतोस ?
पहिला : तो सर्वात सोपा मार्ग आहे.



आपको इस धन कमाने के सरल मार्ग बताने वाली पुस्तक से दूर रहना है, यह तो आपको हँसाते हुए आप से विदा लेने का उपक्रम था बस।

सब से ऊपर दिया बच्चे का चित्र यद्यपि बहुत ही पुराना है, किंतु बालसुलभता देखें कि ऐसी असंभव करामात कर सबको अतिचिंता व गंभीरता में डाल कर वे जनाब अभी भी कुछ चबाने में लगे हैं।

२००९ का यह प्रथम रविवार है, आप खूब ठण्ड में खूब धूप का खूब मजा लें।

वैसे आप को जाते जाते बता दूँ कि कल अर्थात ४ जन. को स्त्रीमुक्तिदिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि सावित्रीबाई फुळे से इसका सम्बन्ध है। इन्हे नहीं जानते? तब तो सु्निए

जे इतिहासापासून धडा घेण्याची तसदी घेत नाही त्यांना इतिहास क्षमा करत नाही

यह एक इतनी महत्वपूर्ण व प्यारी पोस्ट है कि आप स्वयम् ही इसे यहाँ जाकर पूरा पढ़ें.

इति वार्ता:॥

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17 टिप्‍पणियां:

  1. उदाहरण के रूप में अमेरिका का लादेन की खोज में अफगानिस्तान, इजरायल को तो अभी अभी गाज़ापट्टी से भी जान सुन रहे ही हैं, श्रीलंका जैसे देश ने लिट्टे की तबाही की कमर कस ली है। इन उदाहरणों के बाद एक बड़ा प्रश्नवाचक भारत के नाम के साथ था कि भारत क्या कर रहा है? उत्तर था - बयानबाजी।

    ये सभी तुलनायें असंगत तुलनायें हैं। अमेरिका, इजरायल, श्रीलंका ने जिन पर हमले किये वे सब उनके सामने लचर हैं। अफ़गानिस्तान में अमेरिका का कुछ नुकसान नहीं होना है सिवाय कुछ सैनिकों के, इजरायल के लिये जीने-मरने का सवाल है और फ़िलिस्तीनी परमाणु शक्ति संपन्न नहीं है, श्रीलंका और लिट्टे की लड़ाई तो सालों से चल रही है। आज वे हावी कल वे।

    भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। कोई भी किसी पर हमला करता है तो दोनों की भयंकर तबाही सुनिश्चित है। पाकिस्तान अपने आप तबाह होने की स्थिति में पहुंचा देश है। जरूरत है कि जैसा कलाम साहब ने कहा पहले अपने देश में आतंकवादियों के गढ़ तबाह किये जायें।

    चर्चा सुन्दर रही। देखकर अच्छा लगा!

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  2. सबसे बूढी अम्मा मर गईं ? ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें !

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  3. अच्‍छी चर्चा रही.. पढ़ना बहुत अच्‍छा लगा।

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  4. मेघदूत की लिंक लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

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  5. आपका "वे विस्फोटक बनाने की जानकारी भारतीय भाषाओं वाले भिन्न वर्गों को दे रहे हैं" यह वाक्य गलत है, क्योंकी लेख का विषय संगीत से संबंधी है । आप से विनंती है की आप कृपया आपकी टिप्पणी सच्चाई की तरफ खिंचिये, क्योंकी यह अत्याधिक गंभीर मसला है । आपकी एक गलत टिप्पणी किसी निर्दोष का सरदर्द भी बन सकती है ।

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  6. दर्द बढाती है सुनें, मगर है चर्चा नेक.
    धन्यवाद है आपका, मार्ग खोल दिया एक.
    मार्ग खोल दिया एक, चिन्तन संग लेखन का.
    शब्द-साधना,ब्र्हम-साधना, देश-भक्ति का.
    कह साधक कविता, संवेदन खूब जगाती.
    आपकी चर्चा नेक, ह्रदय में दर्द बढाती.

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  7. Your comment is awaiting moderation.

    Bandhu!Khandekar ji,
    aap ki pravishti ki charchaa aap ka dil dukhane ya aise kisi prayojan se nahin ki gayi, apitu bhaarteey bhashaon ko ek mancha par lane ke chhote se yatna ka pratiphal hai.is prasang ka uddeshy hi pahli pankti ke'jaise' dvara is virodhabhas ko dikhane ki thi. aap ki vahan di tippani se mere likhe ke sampreshit na hone vale vakya ki spashtataa ki drishti se ise parivartit kar diya gaya, taki lakshana ke sampreshit na hone ka anarth koi vastavik visphotak se na le le.
    ismein mujhe koi aapatti vali baat dikhayi nahin deti.aap ke vanchhit sudhar kar diye gae.
    kasht ke lie khed hai.

    उत्तर देंहटाएं
  8. कविताजी,

    हम आपका सम्मान करते है । आपने चर्चा पर प्रकाशित लेख मे जो दो सुधार कर दिये है और विदग्ध पर आपकी जो विस्तृत टिपणी दी है इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! आशा है की आपको भी विदग्ध पर लिखे हुँए वाक्यों का खेद नही हुआ होगा । इस सभी घटना के कारण मुझे हिंदी और अच्छी तरह से सीखने की प्रेरणा मिली है ।

    सभी भारतीय भाषाओं को एक मंच पर लाने का आपका प्रयास सराहनीय है और इस के लिए आपकों हार्दिक शुभकामनाएं देता हुँ । मै भारतीय भाषांओ को एक-दुसरे सें जोंडने के हमेशा पक्ष मे रहा हू । इसके बारें मे कई समय पहले मैंने "सुमधुर भाषिणी" इस शीर्षक का एक लेख भी लिखा हैं जिसमें मराठी भाषाको मां समान और अन्य भारतीय भाषाओं को मौंसीयो समान दर्शाया गया है । इस प्रसंग से हम सभी एकसाथ इस उद्देश्य की ओर और अच्छी तरह से काम कर पायेंगे ऐसी आशा है ।

    आपका पुनश्च धन्यवाद!

    जय हिंद, जय भारत!

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  9. बहुत ही बेहतर और विस्तृत चर्चा. निटी वचनो मे कहा है कि मित्र अगर खराब हो तो उससे पीछा छुडाया जा सकता है, पर पडोसी से नही. शायद ये हमारे लिये अभिशाप है जो हमको ऐसे पडोसी मिले.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. ये साइड्बार में चिट्ठाचर्चा का सूत्रवाक्य पता नहीं किसकी कलम (कीबोर्ड) की उपज है पर केवल कविता जी ही इसे निभाती दिख रही हैं, और क्या शानदार तरीके से!

    अनूप जी को शीर्ष चर्चाकार के पद से अपदस्त करने की बधाई.

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  11. आज की चिट्ठाचर्चा ज़रा हटके है.

    अच्छा लगता है जब अलग-अलग चर्चाकार विभिन्न शैलियाँ अपनाते हैं.

    कविता जी ने वास्तव में विस्तृत फलक और बड़े सरोकारों को

    लिया है, जिससे यह स्तम्भ पर्याप्त वैचारिक वैविध्य से संपन्न हो रहा है.

    विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं के चिट्ठों को शामिल करने के कारण यह

    व्यापक अर्थ में नेट-जगत का आइना बनने की दिशा में अग्रसर है.

    हिन्दी को अन्य भाषाओं की गतिविधियों की चर्चा का माध्यम बनाना

    हिन्दी के अपने हित में भी है, इसमें संदेह नहीं.



    आतंकवाद का सन्दर्भ बार - बार उठाकर उसके समाधान की दिशा में सोचते रहने

    और अपनी तरफ़ से तैयार रहने की कोशिश चलती रहनी चाहिए.

    निस्संदेह कूटनैतिक मंच पर भी भारत इस मसले को सटीक प्रचार नहीं दे पाया है.,

    और अब ठीकरा मीडिया के सिर पर फोड़ा जा रहा है.




    शिव कुमार बटालवी जी का गीत पढ़वाने के लिए विशेष आभार.

    यदि उनकी आवाज़ भी उपलब्ध हो तो उसे सहेजने की ज़रूरत है.




    अभिलेखागार से ....अच्छी शुरुआत है. क्रम बना रहे .




    स्त्री लेखन......पर अलग शीर्षक से चर्चा भी स्वागतेय है.

    आदरणीया विमला तिवारी जी की रचना का तेवर नयी पीढी को भी

    ताप देने में सक्षम है. इस चयन के लिए चर्चाकार को पुनः साधुवाद.




    और हाँ, भारतीय स्त्री विमर्श की पुरोधा आदरणीया सावित्री फुले जी

    का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. जन्म दिन पर

    उन्हें याद करना सर्वथा प्रासंगिक रहा.



    फिलहाल इतना ही.


    प्रणाम.

    उत्तर देंहटाएं
  12. कविता जी को वेलकम-बैक...और नये साल की समस्त शुभकामनायें

    सुंदर चर्चा..विमला जी के ब्लौग से परिचय कराने के साभार

    उत्तर देंहटाएं
  13. सभी स्नेही बन्धुओं की प्रतिक्रिया व शुभकामनाओं के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ।

    @ Ghost Buster जी,

    मेरी चर्चा पर आपकी सम्भवत: प्रथम टिप्पणी के लिए व पसन्द करने के लिए आपकी अत्यन्त आभारी हूँ आपने मुझे मानो संकट में डाल दिया है। मेरा ऐसा मानना है कि कोई किसी को पदस्थ या अपदस्थ नहीं करता न कर सकता; क्योंकि सभी की अपनी अपनी मौलिकता व विशिष्ट प्रतिभा होती है, जो निस्सन्देह दूसरे हर किसी से भिन्न होती ही है। जिस प्रकार दूसरे लिखते हैं, उसे मैं चाह कर भी नहीं लिख सकती। उसी प्रकार मेरा लिखा भी दूसरों से भिन्न होगा ही। इस भिन्नता को मैं किसी को बड़ा या किसी को छोटा के रूप में देखने की पक्षधर नहीं हूँ। और इसी प्रकार पसन्द करने वालों का भी अपना अपना भिन्न दृष्टिकोण होता है कि किसी को कुछ रुचता है तो किसी को कुछ। अत: निजी तौर पर ऐसी ऊँच नीच से मुझे कष्ट ही होता है। साहित्य का वास्तविक अर्थ तो सहित भाव व स+ हित अर्थात् सम्यक हित ही है। चर्चा परिवार में ऐसी कोई रेखा कदापि न आए जो इस सहित भाव को अहित भाव में बदले।
    आप को मेरी बातों से कष्ट पहुँचे तो क्षमा करें किन्तु मेरे कर्तव्य ने मुझे बाधित किया कि पुनरपि लिख ही दूँ। आशा है, अन्यथा नहीं लेंगे।

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  14. स्व० बटालवी की कविता ,एवं श्रीमति विमला तिवारी विभोर का उल्लेख ही कई चिट्ठा के बराबर है | रतलामी जी बड़े आशावादी सोच रखते थे , अथवा युग से पीछे जी रहे थे ? आमेरिका का जन्म ही छीन के हुआ ;पूरा अमेरिका रेड इंडियन्स का है | हाँ एक बात अवश्य करें चिट्ठा चर्चा पर ट्रांसलेटिंग साफ्टवेयर भी अवश्य लगा दें जिससे अन्य भाषा का भी आनंद उठाया जा सके | जहाँ मि० "१०% , एक स्मगलर डॉन, का पार्टनर ,अपनी बीबी का हत्यारा ज़रदारी राष्ट्रपति हो , नशीली ड्रग का , हथियारों का स्मगलर राजकीय अतिथि हो ,तथा विश्व का सबसे बड़ा आतंकी शरणागत हो,सेना के रिटायर्ड आफिसर्स सुपारी किलर गैंग के ट्रेनर जो मानव बम नामक हथियार बनाते है ,'''वह देश ब्लैकमेलर नही होगा तो क्या होगा ? चर्चा का हर एक की अपनी शैली होती ही है ,विवधा का चर्चा में आना उसे रूचि कर ही बनता है | सभी को ''''' शुभ कामनाओं सहित """

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  15. इतनी लम्बी चर्चा पढ़ते-पढ़ते जब कमर दुखने लगी तो इसे लिखने वाले का क्या हाल हुआ होगा? यही सोच कर मैने कविता जी से बात की तो पचा चला कि काम की धुन में दो दिन से सोई नहीं हैं और तबीयत खराब हो गयी है। बहुत काम अभी भी अधूरे पड़े हैं।

    ऐसा जुनून हो तो परिणाम तो अच्छा आएगा ही। बधाई के साथ विनती भी कि अपने स्वास्थ्य का भी खयाल रखें। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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