बुधवार, अक्तूबर 18, 2006

अपेक्षित प्रेम [गुजराती चिट्ठे]

भई मैने तो पहले ही कहा था, हमारे गुजराती बन्धुजन अपने चिट्ठों में काव्यजगत का ही मंथन करते रहते हैं.. अब क्या कहें... चलो यही सही। पर मानना पडेगा कि एक से बढकर एक कविताएँ, गज़लें, और दोहे पढने को मिल जाते हैं.... उनमें से कुछ तो भुले बिसरे हैं और कुछ खुद के रचे हुए!

आज बहुत दिनों बाद चिट्ठाचर्चा में आया हुँ, दिवाली आ गई तो साथ में साफ सफाई अभियान भी ले आई, वो भी करना है, और फिर हमारे आई.एस.पी. महोदय ने पंगा खडा कर रखा था! जाने दिजिए... आप तो यह पढिए... अर्ज़ किया है:

मेरे प्रियतम,
मैं नहीं राधा कि नही मीरा,
हाँ उनका अंश जरूर हुँ,
तुम ही मेरे श्याम हो, कबुल।
तुमसे अनहद प्रेम है, कबुल।
मैं तुम्हे चाहती हुँ अंतरमन से, यह भी कबुल!
पर मेरा प्रेम निरपेक्ष नही है।

मैं हरपल मुझे प्राप्त करती हुँ तुम्हारे ही सानिध्य में,
ना मेरा मुझपर अंकुश है,
बेबस हुँ, यह सच है।

प्रिय देखो ना, कितनी अपेक्षाएँ है,
प्रेम मेरा निरपेक्ष नही,
पल पल बस यही कहुँ,
तुम भी जानते हो,
तुम्हे भी अपेक्षा है,
कि मैं स्वयं निरपेक्ष रहुँ।

माफ किजिए यह अर्जी मेरी नहीं... यह अर्ज़ किया है उर्मि सागर ने।

निरपेक्ष प्रेम के बाद देखा कि फोर.एस.वी. में, जो गुजराती का पहला चिट्ठा भी है, एक दुःखद खबर भी प्रकाशित हुई कि रंगभूमि के प्रसिद्ध कलाकार जयन्त व्यास अब नहीं रहे। यह सचमुच दुःखद घटना है। ईश्वर मृत आत्मा को शांति प्रदान करे।

गुजराती सारस्वत परिचय के चिट्ठाकार गुजरात के साहित्यकारों के बारे में अमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं। इसबार उन्होने सुरेश दलाल की जीवन किताब प्रकाशित की है।

उर्मि की प्रेम की अनुभूति जैसा ही कुछ महसुस कर रही हैं नेहा त्रिपाठी:

पत्र में बादल लिखुं,
बस प्रिय कागज लिखुं,
घास पर ओस लिखुं,
महकता हुआ हर पल लिखुं,

ऊंट के पदचिह्न गिनुं,
रेत में मृगजल लिखुं,
शब्द में संगीत भरकर,
सतरंगी जल लिखुं,

प्रिय, सब तुम्हारे लिए,
मौन में भी हर शब्द लिखुं।

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3 टिप्‍पणियां:

  1. बढि़या लिखा है. शुरुआत में कविता ही लिखी जायेगी क्योंकि यह सहज है लोगों के लिये. मेरा सुझाव है कि जिस भी ब्लाग/पोस्ट के बारे में जिक्र किया है यहां पर उसका लिंक उसकी पोस्ट पर डाल दो ताकि लोग देख सकें और हिंदी ब्लाग का चिट्ठाचर्चा भी देखा जाये उनके द्वारा.

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  2. बहुत अच्छा रहा, पंकज. बधाई.

    श्री जयन्त व्यास के निधन का समाचार पढ़कर बहुत दुख हुआ. भगवान से उनकी आत्मा की शान्ति के लिये प्रार्थना है.

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  3. Are pankajbhai, aapane to bahot badhiya likh diya gujarati chitthe par... bahot achchhi charcha hai ye. Hamare chitthe ka jikra karne ke liye bahot bahot shukriya...

    aur to kya kahe hum?
    bas, lage raho pankajbhai!!!!

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