बुधवार, अक्तूबर 15, 2008

लो जी आ गई चिटठा चर्चा

नमस्कार मित्रो..

पिछली बार मेरी ब्लॉगीवुड स्टाइल में की गयी चर्चा पर आपने जो स्नेह दिया उसका मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हू.. और ज़्यादा टाइम ना लेते हुए आपको आज की चर्चा में ले चलता हू..

अभी अभी ताज़ा सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार तलाक़ लेने वाले लोगो और तलाक़शुदा व्यक्तियो को शास्त्री ज़ी रास्ते में मिल गये.. और जो उन्होने बताया वो आप लोग यहा पढ़े..

एक और खबर के अनुसार जहा एक आंटी के ब्लॉग पर एक ही मौसम हमेशा छाया रहता है वही एक दूसरे किस्म के ब्लॉगर जो एक ही पोस्ट में कितने ही मौसम ले आते है.. वो अभी एक टी वी के माध्यम से देखिए आपको कहा कहा ले जा रहे है..

जहा एक और लोग बिना अनुमति लिए एक दूसरे की ऐसी तैसी करने में लगे है वही ऐसे दौर में एक ब्लॉगर श्रीमान पंकज सुबीर ज़ी की अनुमति लेकर ग़ज़ल लिखते पाए गये.. बाद में उनको चेतावनी देकर छोड़ दिया गया..

अभी अभी हमारे एक विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति अपने पूर्ण 'विवेक' से बीच सड़क में रिकवेस्ट करने लगा.. हालाँकि जिनसे रिकवेस्ट की गयी थी वो अपनी गाड़ी से धुँआ उड़ाते हुए निकल गये.. अन्तिम खबर मिलने तक कहा गया था की वो आगे जाकर यु टर्न लेकर आएँगे.. किंतु खबर की पुष्टि नही हो पाई की वो वापस आए या नही..

एक और जानकारी के अनुसार वाशिंग्टन में हुए एक कवि सम्मलेन में कुछ संगीन गतिविधिया हुई.. अनुमान लगाया जा रहा है की इन तस्वीरो में जिस व्यक्ति को आप देख रहे है उस तस्वीर को तीन केमरो से एक साथ लिया गया.. तब जाकर फ्रेम में फिट हुई है..

इस पूरे घटनाक्रम का हमारे विदेश के एक संवाददाता समीर लाल 'जबलपुरी' ने एक वीडियो तैयार किया आप इसे यहा देख सकते है



आइए अब चलते है बाज़ार की खबरो की तरफ..

समीर लाल ज़ी के शहर में नही होने की वजह से टिप्पणियो का सूचकांक कल शाम 9.3023 तक गिरा.. माना जा रहा है की दीवाली पर लोगो के छुट्टियों पर चले जाने से इसमे और गिरावट आ सकती है..

वही कल पोस्ट ठेलने के मामले में भी बाज़ार सुस्त रहा.. एक दिन में छ् पोस्ट लिखने वाले ब्लॉगरो ने भी निराश किया कल शाम खबर मिलने तक उनकी तरफ से तीन चार पोस्ट ही आ पाई थी..

बाज़ार की खबरो के बाद अब वक़्त है सवाल जवाब का आइए देखते है जब हमने किए सवाल तो पोस्ट टाइटल कैसे बने उनके जवाब..

प्र: यदि आप अभिषेक बच्चन होते तो क्या होता?
उ: पुरी जिन्दगी ऐश ही ऐश!

प्र: टिप्पणी करने के लिए क्या ज़रूरी है
ऊ: मेरे हाथ की ताकत

प्र: बेनाम टिप्पणी करने वालो को आप क्या कहेंगे?
ऊ: नादान

प्र: स्त्री विमर्श के बारे में आपकी क्या राय है?
ऊ: माफ करें, यह तो पुरुष विमर्श है

प्र: लॉटरी लगने के बाद ताऊ ने क्या किया?
ऊ: ताऊ ने करवाया ताई और भैंस का बीमा

प्र: नारी विषय पर लिखने के बाद भी यदि टिप्पणी नही आए तो इसे क्या कहेंगे?
ऊ: एक अद्भुत संयोग ...।

प्र: भँवरो के कारवां ने रोज यानी की गुलाब से क्या कहा?
ऊ: आपका दिल हमारे पास है

तो दोस्तो ये थी आज की चिट्ठा चर्चा.. फिर मिलेंगे अगले बुधवार तब तक के लिए जय जय

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14 टिप्‍पणियां:

  1. नेक काम है लगे रहो कुश भाई, भाई बोले तो कुश भाई एक ख़ूबसूरत ख़्याल!

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  2. बहुत जोरदार रहे सवाल जवाब ! आपने सही कहा की पोस्ट और टिपणी दोनों में गिरावट आई है !
    लगता है सब दीवाली की तैयारी में लग गए !

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  3. "आपका क्या कहना है?"

    हमारा यह कहना है कि आपने एक "उम्दा" चर्चा प्रस्तुत की है. आपकी शैली जीवंत है.

    "पोस्ट टाइटल कैसे बने उनके जवाब" एक अच्छा प्रयोग है. प्रति पोस्ट कुल टाईटिलों की संख्या बढा दें तो बहुत लोगों के लिये प्रोत्साहन का कारण हो जायगा एवं काफी अधिक सशक्त आलेख लोगों की नजर आ जायेंगे.

    इस "खूबसूरत ख्याल" के साथ की जल्दी ही आपकी कलम (टंकणी ?) से अगली चर्चा पढेंगे!!!

    सस्नेह

    -- शास्त्री

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  4. बहुत सही...जरा भी शहर से हिलता हूँ और टिप्पणियों का सूचांक टपक लेता है..यह अच्छी बात नहीं है..कुछ करना होगा.

    बेहतरीन चर्चा.

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  5. चर्चा बहुत खूब रही. सवाल वाला हिस्सा पेटेंट करवा लो.

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  6. खूबसूरत ख्‍याल प्रश्‍न बनकर उभरे हैं।

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  7. अच्छी चर्चा...। मुझे याद रखने का धन्यवाद।
    शैली बहुत मजेदार है। नकल मारने की फिराक में हूँ।:)

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  8. बहुत बढिया लिखा है कुश आपने..

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  9. भाई कुश, चर्चा में दम तो है, कड़ियाँ बेहतरीन हैं, पर... ?

    पर, चर्चा को जरा अनौपचारिक बनाओ, बंधु !
    फ़ाइवस्टार के व्यंज़न और ढाबे के कढ़ी-चावल में तुम किसको पसंद करोगे ?
    जो पसंद हो, वह हमें भी दो उसी ईश्टाइल में..
    जैसे चेहरे के सामने गरम रोटी लाकर उसको एक दूसरे पर पीटते हुये लड़का पूछ्ता है.. रोटी.. एक रोटी ?

    ज़मीनी स्तर का अनौपचारिक माहौल हमसब के दिनचर्या से इतना दूर हो गया है,
    कि ब्लागर पर आकर सहमने, मूड टटोल कर लिखने व पढ़ने से बेहतर क्लब में बैठना लगता है ।

    संदर्भ बहुत व्यापक है, और यह डिब्बा बहुत छोटा..
    पर तुममें इतनी संभावनायें हैं कि अधिकारपूर्वक तुमसे अनौपचारिक होने की माँग कर रहा हूँ ।

    'अन्यथा न लेना ' मेरे शब्दकोष से बाहर है, वरना यहाँ उल्लेख अवश्य करता ।

    पुनःश्च-
    मेरे सठियाने की उम्र 80 निर्धारित की गयी है,
    सो इसको मेरे कमेन्ट के डिस्क्लेमर के रूप में लिया जा सकता है !

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