सोमवार, दिसंबर 11, 2006

जीवन के हर हिस्से पर लग गए अधिभार

[बीच मे जब चिट्ठाचर्चा के नियमित साथी व्यस्त थे और मध्याह्न चर्चा में कुछ शिथिलता दिखी तो तो दूसरे पाठक साथी चिट्ठाचर्चा को प्रकाशित होते ने देख हमारे हरफनमौला साथी गिरिराज जोशी ने आज की चर्चा के लिये अपने को तैयार करके पोस्ट लिखी थी और मेल भेजी थी हमें। एक सीधी दूसरी बमार्फत संजय बेंगाणी। इन चिट्ठों की चर्चा आज सबेरे ही रविरतलामी जी कर चुके हैं लेकिन यह देखना रुचिकर होगा कि उन्ही को जोशी जी किस अंदाज़ में पेश करते हैं। आप अपनी राय बतायें ताकि वे अपने लेखन में और चांद लगा सकें]

आज की चर्चा



वैसे तो रविरतलामीजी के व्यंज़ल सभी को पसन्द है मगर इस बार उनका लिखा व्यंज़ल उनकी हवाई यात्राओं पर आजीवन प्रतिबन्ध लगा सकता है और पढ़ने वालों पर "भीड़ भड़क्का अधिभार!"
जीवन के हर हिस्से पर लग गए अधिभार
कोई बताओ कैसे अवरुद्ध होगा ये अतिसार

हमने तो भरी नहीं थी किसी बात की हामी
उन्होंने ही ले लिए जबरन सारे अधिकार

कुछ तो थे हालात और कुछ हमारे करम
जोहते रहे तमाम उम्र चाहत और अभिसार

दोष देता है जमाना हमारी नादानियों का,पर
समर और स्नेह में खूब जायज़ हैं अतिचार

दूसरों की करतूतों पर अब न हँसा करेंगे रवि
इस संसार पर हम भी तो हैं एक अतिभार



इधर सुखसागर में धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर के जन्मोंत्स्व की खुशियाँ मनाई जा रही है।

अगर आपने पहले कभी भूगोल ना पढ़ा हो तो आपके लिए सुनहरा अवसर है। वीरेन्द्र भाई की पुस्तकों में भरा भूगोल पढ़ें :-
पृथ्वी पर फैली आज की पर्वत-श्रृंखला को देखें, अथवा उसके किसी प्राकृतिक मानचित्र को लें। इसमें हरे रंग से निचले मैदान तथा भूरे,स्लेटी, बैंगनी और सफेद रंग से क्रमश: ऊँचे होते पर्वत अंकित हैं। यह पर्वत-श्रेणी मानो यूरोप के उत्तर नार्वे (स्कैंडिनेविया : स्कंद देश) में फन काढ़े खड़ी है। फिर फिनलैंड से होकर पोलैंड, दक्षिण जर्मनी होते हुए स्विस आल्पस (Swiss Alps) पर्वत पर पूर्व की ओर घूम जाती है।

देसीटून्ज़ लगातार निखरता जा रहा है, देखिए यूपी चुनाव का जिन्न… ।

मनिषाजी "अच्छी चीजों का ब्लाग" बनाकर अच्छी-अच्छी खबरें दे रही है:-
'धक धक गर्ल' माधुरी दीक्षित बॉलीवुड में अपनी दूसरी पारी खेलने मुंबई पहुंच चुकी है।
माधुरी की नई फिल्म की शूटिंग जनवरी 2007 के पहले हफ्ते में शुरू होने की संभावना है। शादी से पहले माधुरी ने 15 साल के फिल्म कैरियर में फिल्म इंडस्ट्री को कई बेहतरीन व सुपरहिट फिल्में दीं।

इधर कविराज प्रश्नों में इस कदर उलझे हुए है कि पता नहीं ही चल पा रहा क्या कहना चाह रहें है, आप देखें शायद कुछ समझ सकें -

सुन लेती है जब धड़कनों को सन्नाटे में
क्यूँ कोलाहल में अक्सर मुकर जाती है.



प्रतीक बाबू प्रश्नों की बौछार देखकर इतने व्यथित हुए कि मूर्तियाँ तोड़ने लगे - अब ChuSO4 का मतलब क्या होता है यह तो आप उनके चिट्ठे पर जाकर ही देखियेगा।

अनुनाद सिंह भारतीय न्यायपालिका के त्वरित निर्णय पर लिखते हैं -

यदि भारतीय न्यायपालिका और त्वरित निर्णय देने लगे तो भारत का और भी कल्याण हो। भारत के स्वर्णिम भविष्य के दर्शनार्थियों को न्यायालयों की सक्रियता का हृदय से स्वागत करना चाहिये।


शुरूआती दौर में मुद्दों की चर्चा करने वाले पत्रकार संजय सिन्हा आज कुछ रोंमांटिक लगे -



अब ज्यादातर शहरी महिलाएं पतली होती हैं, और उनका शरीर उतना मांसल नहीं होता जितना पहले की लड़कियों में होता था। ये लड़कियां खाने में कमी नहीं रखतीं, दिन और रात मेहनत करती हैं, पार्टी में जाती हैं, ज्यादातर सिगरेट और शराब को हाथ भी लगाती हैं। फिर भी वो लंबे समय तक जवान और खूबसूरत रहती हैं। बॉडी फिट रहती है।

और दिल्ली ब्लॉग पर मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा है तथा साथ में है कुछ दिलचस्प जानकारियाँ 10 दिसंबर यानी मानवाधिकार दिवस के बारें में। जरूर देखें|

आज की टिप्पणी :



अनुराग श्रीवास्तव द्वारा प्रतीक के चिट्ठे पर -

आज की ताज़ा ख़बर;
तोड़े जाने के लिये भविष्य में मूर्तियों की संख्या में कमी ना हो, इस लिये योरप की एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी ने भारत में मूर्तियाँ बनाने का कारखाना लगाने का प्रस्ताव रखा है.

लेखक:गिरिराज जोशी

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2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा प्रयत्न किया है गिरीराज जी ने, बधाई, कोशिश करते रहिये, अपने आप निखार आ जायेगा।

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  2. चिट्ठा चर्चा मंडली में गिरिराज जी का स्वागत है. अच्छी चर्चा के लिए बधाई व आगे की नियमित, सोमवारी चर्चाओं के लिए शुभकामनाएँ.

    तो क्या मैं अपने आप को सोमवारी चर्चा से मुक्त समझूं? :)

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